Posts

Showing posts from June, 2020

ब्लैक स्पॉट

Image
▪▪▪▪ ब्लैक स्पॉट ▪▪▪▪ एक दिन एक प्रोफ़ेसर अपनी क्लास में आते ही बोला, “चलिए, SURPRISE TEST के लिए तैयार हो जाइये । सभी स्टूडेंट्स घबरा गए…  कुछ किताबों के पन्ने पलटने लगे तो कुछ सर के दिए नोट्स जल्दी-जल्दी पढने लगे । “ये सब कुछ काम नहीं आएगा….”, प्रोफेसर मुस्कुराते हुए बोले, “मैं Question paper आप सबके सामने रख रहा हूँ, जब सारे पेपर बट जाएं तभी आप उसे पलट कर देखिएगा”  पेपर बाँट दिए गए । “ठीक है ! अब आप पेपर देख सकते हैं, प्रोफेसर ने निर्देश दिया ।                                         अगले ही क्षण सभी Question paper को निहार रहे थे, पर ये क्या ?  इसमें तो कोई प्रश्न ही नहीं था ! था तो सिर्फ वाइट पेपर पर एक ब्लैक स्पॉट! ये क्या सर ?  इसमें तो कोई question ही नहीं है,  एक छात्र खड़ा होकर बोला । प्रोफ़ेसर बोले, “जो कुछ भी है आपके सामने है ।  आपको बस इसी को एक्सप्लेन करना है… और इस काम के लिए आपके पास सिर्फ 10 मिनट हैं…चलिए शुरू हो जाइए…” स्टूडेंट्स के पास कोई चारा नहीं था…वे अपने-अपने answer लिखने लगे । समय ख़त्म हुआ, प्रोफेसर ने answer sheets collect की और बारी-बार

ईश्वर के प्रति आभार

Image
                                                          ईश्वर के प्रति आभार एक पुरानी सी इमारत में था वैद्यजी का मकान था। पिछले हिस्से में रहते थे और अगले हिस्से में दवाख़ाना खोल रखा था। उनकी पत्नी की आदत थी कि दवाख़ाना खोलने से पहले उस दिन के लिए आवश्यक सामान एक चिठ्ठी में लिख कर दे देती थी। वैद्यजी गद्दी पर बैठकर पहले भगवान का नाम लेते फिर वह चिठ्ठी खोलते। पत्नी ने जो बातें लिखी होतीं, उनके भाव देखते, फिर उनका हिसाब करते। फिर परमात्मा से प्रार्थना करते कि हे भगवान ! मैं केवल तेरे ही आदेश के अनुसार तेरी भक्ति छोड़कर यहाँ दुनियादारी के चक्कर में आ बैठा हूँ। वैद्यजी कभी अपने मुँह से किसी रोगी से फ़ीस नहीं माँगते थे। कोई देता था, कोई नहीं देता था किन्तु एक बात निश्चित थी कि ज्यों ही उस दिन के आवश्यक सामान ख़रीदने योग्य पैसे पूरे हो जाते थे, उसके बाद वह किसी से भी दवा के पैसे नहीं लेते थे चाहे रोगी कितना ही धनवान क्यों न हो। एक दिन वैद्यजी ने दवाख़ाना खोला।                                          गद्दी पर बैठकर परमात्मा का स्मरण करके पैसे का हिसाब लगाने के लिए आवश्यक साम

आत्मनिरीक्षण

Image
                                     आत्म निरीक्षण एक छोटा सा लड़का जो कि लगभग ११-१२ वर्ष का रहा होगा ,एक दवाई कि दुकान में गया और उसके मालिक से एक फ़ोन मिलाने कि आज्ञा ली.फिर उसने एक बड़ा सा बक्सा खिसकाया और उस पर चढ़ गया जिससे कि वह ऊपर रखे हुए फ़ोन तक पहुँच सके . दुकान का मालिक चुपचाप उस लड़के कि बातचीत सुनने लगा .बालक ने एक महिला को फ़ोन मिलाया और बोला , " क्या आप मुझे अपना बगीचा और लॉन काटने का काम दे सकती हैं ?"                   इस पर वह महिला फ़ोन के दूसरी ओर से बोली ," मेरे लॉन कि  कटाई का काम पहले से कोई कर रहा है . बालक , " किन्तु ,मैं आपके लॉन कि कटाई का काम उससे आधे दाम पर करने के लिए तैयार हूँ ."          महिला , " जो लड़का मेरे लॉन की कटाई का काम कर रहा है , मैं उसके काम से पूरी तरह संतुष्ट हूँ . "   इस पर वह  बालक ओर अधिक निश्चय पूर्वक बोला , " मैं आप के लॉन के  चारों  ओर का रास्ता भी साफ़ कर दिया करूँगा ओर आप के  घर के बाहर    के शीशे  भी साफ़ कर दिया करूंगा ."  बोली ," नहीं , मुझे कि

योग्यता का मापदंड

Image
                                                          योग्यता का मापदंड सिंगापुर में परीक्षा से पहले प्रिंसिपल ने बच्चों के पैरेंट्स को एक लेटर भेजा जिसका हिन्दी अनुवाद इस प्रकार है : "डियर पैरेंट्स, मैं जानता हूं आप इसको लेकर बहुत बेचैन हैं कि आपका बेटा इम्तिहान में अच्छा प्रदर्शन करें, लेकिन ध्यान रखें कि यह बच्चे जो इम्तिहान दे रहे हैं इनमें भविष्य के अच्छे कलाकार भी हैं जिन्हें गणित समझने की बिल्कुल जरूरत नहीं, इनमें बड़ी बड़ी कंपनियों के प्रतिनिधि भी बैठे हैं, जिन्हें इंग्लिश लिटरेचर और इतिहास समझने की जरूरत नहीं है,                                             इन बच्चों में भविष्य के बड़े-बड़े संगीतकार भी हैं जिनकी नजर में केमिस्ट्री के कम अंकों का कोई महत्व नहीं, इन सबका इनके भविष्य पर कोई असर नहीं पड़ने वाला इन बच्चों में भविष्य के एथलीट्स भी हैं जिनकी नजर में उनके मार्क्स से ज्यादा उन की फिटनेस जरूरी है| लिहाजा अगर आपका बच्चा ज्यादा नंबर लाता है तो बहुत अच्छी बात है लेकिन अगर वह ज्यादा नंबर नहीं ला सका तो तो आप बच्चे से उसका आत्मविश्वास और उसका स्

पैरों के निशान

Image
                                                            पैरों के निशान कल रात मुझे एक स्वप्न आया । मैंने देखा कि मेरा सुख का समय चल रहा था के और मैं समुद्र के किनारे की रेत में चला जा रहा था । मैं जहाँ - जहाँ भी जा रहा था , वहाँ - वहाँ मेरे पैरों के निशान रेत में बने हुए थे । लेकिन एक चमत्कारिक बात थी और वह यह कि रेत में एक जोड़ी के स्थान पर दो जोड़ी पैर दिख रहे थे। अर्थात , जहाँ - जहाँ भी मैं गया , ईश्वर मेरे साथ था ।   स्वप्न के दूसरे भाग अब मेरा दुःख का समय था , मुसीबत का समय था । मैं तनाव तनाव तनाव में था , विपत्ति से जूझ रहा था । ऐसे समय में , ऐसे वक्त में भी मैं समुद्र के किनारे की रेत मैं चला जा रहा था । किंतु , यह देख कर मुझे अत्यन्त दुःख हुआ कि ऐसे समय में रेत पर केवल एक जोड़ी पैरों के निशान ही दिख रहे थे । अतः मुझसे न रहा गया और मैंने ईश्वर से शिकायत की  कि  हे ईश्वर ऐसा क्यों ? विपत्ति के समय में आपने